Chitra
चित्रा
चित्रा — 'चमकीला' या 'रंग-बिरंगा' — कलात्मकता, सौंदर्य और वास्तुकार की दृष्टि का नक्षत्र। दिव्य शिल्पी विश्वकर्म के अधीन कच्चे पदार्थ से अद्भुत सृजन।
स्वामी ग्रह
मंगल
देवता
विश्वकर्मा
प्रतीक
चमकता रत्न
तत्व
अग्नि
गुण
तमस
अंश
23°20' कन्या – 6°40' तुला
तारा
स्पाइका (चित्रा)
पशु
मादा बाघ
रत्न
मूंगा
नाम अक्षर (आक्षर)
परंपरा के मुताबिक इस नक्षत्र में जन्मे लोगों के लिए इन अक्षरों से शुरू होने वाले नाम सुझाए जाते हैं।
व्यक्तित्व
चित्रा जातक किसी न किसी रूप में उल्लेखनीय — शारीरिक सौंदर्य, तेज़ बुद्धि या असाधारण रचनात्मक दृष्टि। सौंदर्य की दृष्टि; स्थायी प्रभाव वाला कुछ बनाने की प्रेरणा। चुंबकीय, स्वतंत्र, अक्सर अप्रत्याशित।
गुण
- असाधारण सौंदर्यबोध
- प्रखर और रचनात्मक
- चुंबकीय और आकर्षक
- स्वतंत्र और साहसी
- दूरदर्शी और आविष्कारी
- असाधारण कुछ बनाने की प्रबल इच्छा
चुनौतियाँ
- घमंड या आत्म-केंद्रित
- अप्रत्याशित व्यवहार
- उत्तेजक या टकरावपूर्ण
- व्यावहारिकता में कठिनाई
- बेचैन, जल्दी ऊब
- असुरक्षा पर छल की ओर
करियर और व्यवसाय
प्रेम और रिश्ते
चित्रा जातक भावुक, तीव्र साथी; संबंध में सौंदर्य और उत्तेजना चाहिए। चुनिंदा — जितना वे होना चाहते उतना ही शानदार साथी। प्रतिबद्धता में चुनौती हो सकती है।
अनुकूल नक्षत्र
स्वास्थ्य
गुर्दा, कमर, त्वचा और प्रजनन स्वास्थ्य। मंगल से गर्मी संबंधी रोग; शरीर को अत्यधिक धकेलने की प्रवृत्ति।
आध्यात्मिक पथ
चित्रा का आध्यात्मिक मार्ग सौंदर्य को दिव्य अर्पण के रूप में सृजन। विश्वकर्म का स्वर्गीय संसार निर्माण साधारण से परे कुछ बनाने की इच्छा में दर्शाया जाता है।
देवता मंत्र
ॐ विश्वकर्मणे नमः (Om Vishvakarmanae Namah)
रत्न
मूंगा
कोई भी रत्न पहनने से पहले किसी ज्योतिषी से सलाह लें
उल्लेखनीय व्यक्तित्व
नोट: नक्षत्र गणना में जन्म समय सटीक होना ज़रूरी है। ये पारंपरिक खूबियाँ हैं और स्रोत के हिसाब से अलग हो सकती हैं।
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