✦ वैदिक ज्योतिष
योग संग्रह
सभी प्रमुख वैदिक ज्योतिष योगों का पूरा संदर्भ — वे कैसे बनते हैं, कितने प्रबल हैं, कब सक्रिय होते हैं, और क्या फल देते हैं।
वैदिक ज्योतिष में, एक योग (संस्कृत: योग) ग्रहों का एक खास संयोग है जो निश्चित फल देता है। योग मुख्यतः जुड़े ग्रहों की दशा काल में सक्रिय होते हैं — उनके प्रभाव दशा शुरू होने तक दबे रह सकते हैं।
योग कैसे काम करते हैं
निर्माण
योग तब बनता है जब ग्रह जन्म के समय विशिष्ट राशियों, भावों या एक-दूसरे के साथ संबंधों में स्थित होते हैं। पश्चिमी ज्योतिष के विपरीत, अधिकांश वैदिक योग सटीक अंश कोणों के बजाय राशि स्थिति पर आधारित होते हैं।
सक्रियण
अधिकांश योग विंशोत्तरी दशा काल तक दबे रहते हैं। गज केसरी योग बृहस्पति दशा तक पूर्ण फल नहीं दे सकता — जो जीवन में दशकों बाद हो सकती है।
बदलाव
हर योग उसमें शामिल ग्रहों की शक्ति और स्थिति से बदल जाता है। नीच ग्रहों से बना राजयोग मध्यम फल देता है। उच्च ग्रहों से केंद्र में बना वही योग असाधारण फल देता है।
रद्द
कुछ योग अन्य को रद्द करते हैं। नीच भंग राजयोग नीचता को रद्द करता है। केमद्रुम भंग केमद्रुम को। कठोर फल का अनुमान लगाने से पहले हमेशा रद्द होने की शर्तें जांचें।
सफलता, अधिकार और सांसारिक पहचान। ये योग दशा काल में करियर की ऊंचाइयों और नेतृत्व की भूमिकाओं को सक्रिय करते हैं।
धन, समृद्धि और सम्पन्नता। ये योग आर्थिक लाभ लाते हैं — खास तौर पर जब 2nd या 11th भाव के स्वामी भी शामिल हों।
सद्गुण, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति। ये योग चरित्र और धार्मिक जीवन के लिए पहचान दिलाते हैं।
चंद्र-आधारित योग जो मन, भावनाओं और सहायक रिश्तों को प्रभावित करते हैं। चंद्रमा की शक्ति इन योगों को गहराई से प्रभावित करती है।
अहम योग जो किसी एक श्रेणी में नहीं आते — अक्सर ग्रह-विनिमय या संयोजन योग जिनके बड़े प्रभाव होते हैं।
चुनौतियाँ और कार्मिक परीक्षाएँ। ये योग मुश्किल अनुभव लाते हैं जो आखिरकार विकास और बदलाव की तरफ ले जाते हैं।
♛ राजा योग
रुचक योग
उच्च शक्तिनिर्माण
मंगल अपनी राशि (मेष, वृश्चिक) या उच्च (मकर) में हो और किसी केंद्र भाव (प्रथम, चतुर्थ, सप्तम या दशम) में स्थित हो।
फल
असाधारण शारीरिक ऊर्जा, साहस, दृढ़ इच्छाशक्ति और नेतृत्व क्षमता। जातक अक्सर सेना, शल्य चिकित्सा, खेल या कानून प्रवर्तन में उत्कृष्ट होते हैं।
कब सक्रिय
मंगल की महादशा/अंतर्दशा में सबसे प्रबल। मंगल के गोचर से जन्म स्थिति या जिस केंद्र में है उस भाव पर भी योग सक्रिय होता है।
भद्र योग
उच्च शक्तिनिर्माण
बुध अपनी राशि (मिथुन, कन्या) या उच्च (कन्या) में किसी केंद्र भाव में हो।
फल
तीक्ष्ण बुद्धि, उत्तम स्मृति, वाक्पटुता; लेखन, व्यापार, वाणिज्य, गणित और मीडिया में सफलता।
कब सक्रिय
बुध की महादशा/अंतर्दशा। बुध तेज गति से चलता है, इसलिए जन्म केंद्र से गुजरने वाले गोचर इस योग को बार-बार पुष्ट करते हैं।
हंस योग
उच्च शक्तिनिर्माण
गुरु अपनी राशि (धनु, मीन) या उच्च (कर्क) में किसी केंद्र भाव में हो।
फल
ज्ञान, धर्म, आध्यात्मिक उन्नति और समृद्धि। जातक विद्वान, दार्शनिक और शिक्षक या परामर्शदाता के रूप में सम्मानित होते हैं।
कब सक्रिय
गुरु की महादशा/अंतर्दशा। गुरु का बारह वर्ष का गोचर चक्र लगभग हर बारह वर्ष में योग भाव को पुनः सक्रिय करता है।
मालव्य योग
उच्च शक्तिनिर्माण
शुक्र अपनी राशि (वृष, तुला) या उच्च (मीन) में किसी केंद्र भाव में हो।
फल
सौंदर्य, कलात्मक प्रतिभा, विलासिता, प्रेम संतुष्टि; कला, मनोरंजन और फैशन में सफलता।
कब सक्रिय
शुक्र की महादशा/अंतर्दशा, विशेषकर जब शुक्र पंचम या सप्तम का स्वामी भी हो।
शश योग
उच्च शक्तिनिर्माण
शनि अपनी राशि (मकर, कुंभ) या उच्च (तुला) में किसी केंद्र भाव में हो।
फल
अनुशासित अधिकार, दीर्घायु, निरंतर प्रयास से सफलता; कानून, राजनीति या बड़े संगठनों में नेतृत्व।
कब सक्रिय
शनि की महादशा। शनि की धीमी गति से परिणाम अक्सर छत्तीस वर्ष के बाद दिखते हैं और जीवन भर स्थिर बढ़ते हैं।
राज योग
उच्च शक्तिनिर्माण
त्रिकोण (प्रथम, पंचम, नवम) और केंद्र (प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, दशम) के स्वामी युति या परस्पर दृष्टि में हों — विशेषकर जब लग्नेश उनमें से एक हो।
फल
सफलता, अधिकार, नेतृत्व और मान्यता। वैदिक ज्योतिष में सांसारिक उपलब्धि का प्रमुख शास्त्रीय संकेत।
कब सक्रिय
दोनों ग्रहों की महादशा और अंतर्दशा। सबसे प्रबल जब दोनों क्रमिक रूप से चलें।
धर्म-कर्माधिपति योग
उच्च शक्तिनिर्माण
नवमेश (धर्म) और दशमेश (कर्म) युति में हों, राशि परिवर्तन करें या परस्पर दृष्टि करें।
फल
उद्देश्य और धर्म से जुड़ा करियर — अक्सर शिक्षा, चिकित्सा, कानून, आध्यात्मिक कार्य या समाजहित की सेवा में।
कब सक्रिय
नवम या दशमेश की महादशा। गुरु के दृष्टि होने पर और भी प्रबल।
गजकेसरी योग
भिन्न शक्तिनिर्माण
जन्म चंद्र से गुरु किसी केंद्र (प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, दशम) में हो।
फल
ज्ञान, वाक्पटुता, स्थायी यश और सम्मान। जातक ज्ञान से प्रभाव रखता है और गुरु-शिक्षकों से बहुत लाभ उठाता है।
कब सक्रिय
गुरु और चंद्र की महादशा/अंतर्दशा। गुरु मजबूत (स्वराशि, उच्च, अच्छी दृष्टि) हो तो सर्वाधिक प्रभाव।
नीच भंग राज योग
उच्च शक्तिनिर्माण
नीच ग्रह की 'रद्दी' कई शर्तों से: स्वामी केंद्र में हो, उस राशि में उच्च होने वाला ग्रह केंद्र में हो, या नीच ग्रह स्वामी से राशि परिवर्तन करे।
फल
प्रारंभिक कष्ट के बाद असाधारण उन्नति। जातक गंभीर शुरुआती बाधाएँ पार करके उल्लेखनीय सफलता पाते हैं — राजनीति और व्यापार में विशेष रूप से।
कब सक्रिय
नीच ग्रह की महादशा। 'रद्दी' सक्रिय होने पर कमजोरी असाधारण शक्ति में बदल जाती है।
विपरीत राज योग
उच्च शक्तिनिर्माण
दुष्टान (षष्ठ, अष्टम, द्वादश) के स्वामी अन्य दुष्टान में हों और केंद्र-त्रिकोण स्वामियों से जुड़े न हों।
फल
असफलता जैसी स्थिति से सफलता। शत्रु की हार, विरासत, गुप्त स्रोत या आपदा जैसी परिस्थिति से लाभ — विशेषकर उनकी महादशा में।
कब सक्रिय
षष्ठ, अष्टम या द्वादशेश की महादशा। अचानक भाग्य पलटने की विशेषता।
गुरु-मंगल योग
भिन्न शक्तिनिर्माण
गुरु और मंगल केंद्र संबंध में हों (एक दूसरे से प्रथम, चतुर्थ, सप्तम या दशम में)।
फल
सिद्धांतपरक नेतृत्व — गुरु का ज्ञान और मंगल का साहस। शिक्षा प्रशासन, सैन्य कमान, कानून या धार्मिक नेतृत्व में उत्कृष्टता।
कब सक्रिय
गुरु-मंगल अंतर्दशा संयोजन। दोनों स्वराशि या उच्च में हों तो सबसे प्रबल।
◈ धन योग
लक्ष्मी योग
उच्च शक्तिनिर्माण
शुक्र (प्राकृतिक धन कारक) स्वराशि या उच्च में हो और त्रिकोण या केंद्र में हो; नवमेश भी मजबूत हो।
फल
असाधारण धन, सौंदर्य, विलासिता और समृद्धि। अभ्युदय की देवी के नाम पर — प्रमुख धन योगों में से एक।
कब सक्रिय
शुक्र की महादशा, विशेषकर नवमेश की अंतर्दशा में (या इसके विपरीत)।
सरस्वती योग
उच्च शक्तिनिर्माण
गुरु, शुक्र और बुध सभी केंद्र, त्रिकोण या द्वितीय भाव में हों — और कम से कम एक स्वराशि या उच्च में हो।
फल
उत्कृष्ट बौद्धिक और रचनात्मक प्रतिभा। लेखन, विद्वता, संगीत, कला और शिक्षा में उत्कृष्टता; ज्ञान से आर्थिक सफलता।
कब सक्रिय
गुरु या शुक्र की महादशा, विशेषकर जब बुध भी मजबूत और अच्छी दशा में हो।
अधि योग
उच्च शक्तिनिर्माण
शुक्र, बुध और गुरु चंद्र से षष्ठ, सप्तम और अष्टम भावों में हों (इन तीन भावों में किसी भी संयोजन में)।
फल
नेतृत्व, धन और सम्मान। जातक सेनापति, मंत्री या अपने क्षेत्र में प्रमुख बनते हैं। सांसारिक सफलता के लिए अत्यंत शुभ योग।
कब सक्रिय
शुक्र, बुध या गुरु की महादशा, जब ये ग्रह अच्छी स्थिति में हों।
वसुमती योग
मध्यम शक्तिनिर्माण
सभी शुभ ग्रह (गुरु, शुक्र, बुध, चंद्र) लग्न या चंद्र से उपचय भावों (तृतीय, षष्ठ, दशम, एकादश) में हों।
फल
भारी धन और समृद्धि। नाम का अर्थ 'धनवान' — करियर और प्रयास से आर्थिक प्रचुरता।
कब सक्रिय
शुभ ग्रहों की महादशा। उम्र बढ़ने पर उपचय भाव सुधरते हैं, योग भी मजबूत होता है।
चंद्र-मंगल योग
भिन्न शक्तिनिर्माण
चंद्र और मंगल युति में हों या परस्पर दृष्टि करें।
फल
अचल संपत्ति, विनिर्माण, कृषि या व्यापार से धन। मजबूत आर्थिक प्रेरणा और व्यापारिक दक्षता। भावनात्मक स्वभाव भी दर्शा सकता है।
कब सक्रिय
चंद्र या मंगल की महादशा/अंतर्दशा। दोनों अच्छी राशि में और अपाहिज हों तो सर्वाधिक शुभ।
बुधादित्य योग
भिन्न शक्तिनिर्माण
सूर्य और बुध एक ही राशि में युति में हों।
फल
बुद्धि, विश्लेषण, संवाद कौशल और बौद्धिक मान्यता। लेखन, सरकारी सेवा और व्यापार में सफलता।
कब सक्रिय
सूर्य या बुध की महादशा। सूर्य के साथ बुध अक्सर अस्त होता है — देखें बुध सूर्य से आगे या पीछे है (वक्री बुध अस्त से बच सकता है)।
✦ आध्यात्मिक योग
अमल योग
मध्यम शक्तिनिर्माण
प्राकृतिक शुभ ग्रह (गुरु, शुक्र, बुध, अपाहिज चंद्र) लग्न या चंद्र से दशम भाव में हो।
फल
निर्दोष, सदाचारी कीर्ति। जातक अपने सद्गुण और मानवीय योगदान से मृत्यु के बाद भी याद रहता है।
कब सक्रिय
शुभ ग्रह की महादशा। दशम में गुरु या शुक्र से सर्वाधिक प्रबल।
चामर योग
मध्यम शक्तिनिर्माण
गुरु या शुक्र लग्न (प्रथम) में स्वराशि या उच्च में हो, या लग्नेश उच्च में केंद्र में हो और गुरु दृष्टि करे।
फल
राजसी आचरण, विद्या, वाक्पटुता; बौद्धिक या आध्यात्मिक प्राधिकारी के रूप में मान्यता। ज्ञान से सम्मान।
कब सक्रिय
गुरु, शुक्र या लग्नेश की महादशा।
☽ चंद्र योग
सुनफा योग
भिन्न शक्तिनिर्माण
सूर्य या राहु/केतु के अलावा कोई ग्रह चंद्र से द्वितीय भाव में हो।
फल
स्वनिर्मित धन, बुद्धि और अपने प्रयास से सफलता — विरासत नहीं। प्रकृति उस ग्रह पर निर्भर करती है जो योग बनाता है।
कब सक्रिय
योग ग्रह और चंद्र की महादशा।
अनफा योग
भिन्न शक्तिनिर्माण
सूर्य या राहु/केतु के अलावा कोई ग्रह चंद्र से द्वादश भाव में हो।
फल
यश, सद्गुण, नेतृत्व और शारीरिक स्वास्थ्य। जातक में आकर्षण और सम्मान की प्रवृत्ति।
कब सक्रिय
योग ग्रह और चंद्र की महादशा। गुरु, शुक्र या बुध से सर्वाधिक शुभ।
दुरुधर योग
भिन्न शक्तिनिर्माण
चंद्र से द्वितीय और द्वादश दोनों भावों में ग्रह हों (सुनफा और अनफा एक साथ)।
फल
धन, यश और उदारता। सुनफा या अनफा से अकेले अधिक शक्तिशाली — संसाधन आते-जाते रहते हैं पर जातक समृद्ध होता है।
कब सक्रिय
संबंधित ग्रहों में से किसी की महादशा।
केमद्रुम योग
निम्न शक्तिनिर्माण
चंद्र से द्वितीय या द्वादश में कोई ग्रह न हो, और चंद्र से युति में भी कोई न हो।
फल
अकेलेपन, अस्थिरता, सहारे की कमी (यदि रद्द न हो)। चंद्र एकाकी, मन और भावनात्मक सहारा कमजोर।
कब सक्रिय
चंद्र की महादशा विशेष रूप से कठिन हो सकती है। केंद्र में मजबूत ग्रह या मजबूत लग्नेश इसे रद्द कर सकते हैं।
शुभ कर्तरी योग
मध्यम शक्तिनिर्माण
किसी भाव या लग्न के दोनों ओर प्राकृतिक शुभ ग्रह (गुरु, शुक्र, बुध, अपाहिज चंद्र) हों।
फल
उस भाव के कारकत्व के लिए रक्षा, सहारा और शुभ फल। दोनों तरफ से सहारा मिलने जैसा — जो भाव दर्शाता है वह फलता-फूलता है।
कब सक्रिय
शुभ ग्रहों की महादशा, विशेषकर जब वे योग भावों से गुजरें।
◇ सामान्य योग
परिवर्तन योग
भिन्न शक्तिनिर्माण
दो ग्रह एक-दूसरे की राशि में हों (राशि परिवर्तन)। जैसे सूर्य तुला में, शुक्र सिंह में।
फल
दोनों ग्रह एक-दूसरे को बल देते हैं और दोनों राशियों में युति जैसे व्यवहार करते हैं। शक्ति भावों और ग्रहों के प्राकृतिक संबंध पर निर्भर।
कब सक्रिय
किसी भी ग्रह की महादशा/अंतर्दशा। परिवर्तन से दोनों भाव एक साथ सक्रिय।
⚠ दोष योग
पाप कर्तरी योग
निम्न शक्तिनिर्माण
किसी भाव के दोनों ओर प्राकृतिक पाप ग्रह (शनि, मंगल, सूर्य, राहु, केतु) हों।
फल
पीड़ित भाव के कारकत्व दबते हैं — प्रथम के लिए स्वास्थ्य, सप्तम के लिए वैवाहिक कष्ट, दशम के लिए करियर बाधा।
कब सक्रिय
पाप ग्रहों की महादशा और उस भाव पर उनके गोचर।
कालसर्प योग
भिन्न शक्तिनिर्माण
सात दृश्य ग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि) राहु-केतु की एक ओर हों — कोई भी अक्ष के बाहर न हो।
फल
तीव्र एकाग्रता पर कर्मिक विलंब, अचानक उलटफेर और गहन जीवन अनुभव भी। लंबे संघर्ष के बाद असाधारण सफलता भी संभव।
कब सक्रिय
राहु और केतु की महादशा। राहु-केतु गोचर और ग्रहण भी सक्रिय करते हैं।
गुरु चांडाल योग
भिन्न शक्तिनिर्माण
गुरु राहु (कभी-कभी केतु) से युति या निकट दृष्टि में एक ही राशि में हो।
फल
अपरंपरागत ज्ञान, नैतिकता और अधिकारियों से टकराव, रहस्यमय विषयों में रुचि। असामान्य ज्ञान के शक्तिशाली शिक्षक या नैतिक भ्रम — दोनों संभव।
कब सक्रिय
राहु या गुरु की महादशा/अंतर्दशा। जन्म गुरु के निकट ग्रहण काल भी सक्रिय करता है।
अपने योग जानें
अपनी वैदिक जन्म कुंडली तैयार करें — देखें कि आपकी कुंडली में कौन से योग हैं और वे कब सक्रिय होते हैं।